61 साल पुरानी लोरी, चंदा मामा से बेटे की नींद की गुहार लगाती मां, लता मंगेशकर की आवाज में बसा ममता का एहसास
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61 साल पुरानी लोरी, चंदा मामा से बेटे की नींद की गुहार लगाती मां, लता मंगेशकर की आवाज में बसा ममता का एहसास


मनोरंजन 09 September 2026
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61 साल पुरानी लोरी, चंदा मामा से बेटे की नींद की गुहार लगाती मां, लता मंगेशकर की आवाज में बसा ममता का एहसास

बॉलीवुड में मां के दर्द, करूणा और उसके प्यार को हमेशा से शानदार तरीके से सजा कर दिखाया गया है. 90 का दशक इस एहसास को समझाने और दिल को छूने के लिए बेहद यादगार समय माना गया था. क्योंकि इस दौरान कई ऐसी फिल्में आई जिन्होंने ममता की भावनाओं को बेहतरीन तरीके से पर्दे पर ढालने का दम दिखाया. 

जैसे अनुराग मूवी में नूतन अपने सात साल के बेटे को लोरी गाकर सुलाती तो वही फिल्म मुक्ति में लोरी सुनाकर बेटी के साथ खुशी से झूमते हुए शशि कपूर . इसके बाद भोजपुरी सिनेमा ने भी इस एहसास को समझने और अपनी पर्दे पर सजाने की कोशिश की और साल 1965 में भौजी मूवी से हिंदी की लोकप्रिय लोरी चंदा मामा दूर के को ममता के एहसास में पिरोकर दिखाने की कोशिश की गई है.

मां के एहसास के साथ देवर को लोरी गाकर सुलाती है भौजी

साल 1965 में रिलीज हुई भोजपुरी फिल्म भौजी में चंदा मामा दूर के कोऐ 'चंदा मामा आरे आवा पारे आवा" के बोल में ढालकर पर्दे पर फिल्माया गया है. जिसमें भौजी का किरदार निभा रही कुमकुम (जो फिल्म में भाभी का किरदार निभा रही है) अपने देवर को लोरी गाकर सुलाती . जिसके बोल होते है "ऐ चंदा मामा आरे आवा, पारे आवा, नदिया किनारे आवा... सोना के कटोरी दूध भात ले ले आवा, बबुआ का मुआ में घुटुक".

एक क्लासिक भोजपुरी पारिवारिक और सामाजिक ड्रामा फिल्म है, जिसका जिसका निर्देशन कुंदन कुमार ने किया था. इस सदाबहार लोरी को सुर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी, जिसे चित्रगुप्त ने संगीतबद्ध किया था और इसके बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे. फिल्म में कुमकुम एक ममतामयी भाभी (भौजी) के रूप में अपने छोटे देवर को सुलाने और बहलाने के लिए इस गाने को गाती हैं.


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