प्रशांत महासागर की अथाहा गहराइयों में कुछ ऐसा घट रहा है, जिसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. समंदर की सतह के नीचे अचानक बिजली जैसी कड़कड़ाहट और चमक दिखाई देती है, जो एक पल में गायब हो जाती है. इसे 'Te Lapa' या 'द फ्लैशिंग' कहा जाता है. ताज्जुब की बात यह है कि बिना किसी तूफ़ान के पानी के नीचे ये लाइटें जलती हैं और आज की एडवांस टेक्नोलॉजी भी इसका सटीक कारण नहीं खोज पाई है.
प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' वाले इलाके में पानी के नीचे बिजली कड़कने जैसी घटनाएं देखी जा रही हैं. सुमात्रा और जावा से लेकर चिली तक फैली इस विशाल समुद्री पट्टी में पानी के अंदर अचानक टॉर्च जैसी रोशनी जलती है और तुरंत बुझ जाती है. इस रोशनी का आसमान के तूफ़ानों से कोई लेना-देना नहीं है. प्राचीन समय में पोलिनेशिया के नाविक इसी रोशनी की मदद से बिना दिशा-सूचक के समंदर में टापू खोज लिया करते थे.
वैज्ञानिकों के पास नहीं है कोई जवाब
सांस्कृतिक मानव विज्ञानी मैरिएन जॉर्ज ने सोलोमन द्वीप समूह के पास इस रहस्यमयी चमक को अपनी आँखों से देखा है. उन्होंने बताया कि यह ऐसा लगता है जैसे पानी के नीचे कोई टॉर्च जलाकर तुरंत बुझा दी गई हो. उन्होंने अपनी स्टडी में बताया कि यह चमक जलमग्न ज़मीन के पास से निकलती है. लेकिन आज की आधुनिक साइंस और उपकरण भी यह पता लगाने में असमर्थ हैं कि आखिर पानी के अंदर यह बिजली पैदा कैसे हो रही है.
क्या भूकंप और ज्वालामुखी हैं इसके जिम्मेदार
रिंग ऑफ फायर वह इलाका है जहाँ लगातार टेक्टोनिक प्लेटें खिसकती हैं और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं. मैरिएन जॉर्ज का मानना है कि प्लेटों के खिसकने से बनने वाली विद्युत-चुंबकीय तरंगें (Electromagnetic Emissions) पानी में ऐसी लाइटें पैदा कर सकती हैं. हालांकि, वैज्ञानिकों ने तारे, उपग्रह या वायुमंडलीय कारणों को पूरी तरह खारिज कर दिया है.
खारे पानी में बिजली जमना असंभव
शुरुआत में वैज्ञानिकों को लगा कि यह सेंट एल्मो की आग (St. Elmo's Fire) जैसा कोई प्लाज्मा हो सकता है, लेकिन यह पानी के नीचे नहीं बन सकता. कुछ का मानना था कि हाइड्रोथर्मल वेंट्स के पास वोल्टेज बढ़ने से ऐसा होता है. लेकिन चूंकि समंदर का खारा पानी बिजली का बहुत अच्छा सुचालक (Conductor) होता है, इसलिए पानी में बिजली का इस तरह चार्ज होकर जमा होना नामुमकिन माना जाता है.
क्या समुद्री जीव फैला रहे हैं यह रोशनी
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन हुथ के मुताबिक, इसका एक कारण बायोलुमिनेसेंस (Bioluminescence) हो सकता है. हो सकता है कि डार्क में चमकने वाले सूक्ष्म जीव (Dinoflagellates) पानी में मौजूद हों और जब कोई मछली वहाँ से तेजी से गुजरती हो, तो दबाव के कारण वे अचानक चमक उठते हों. हालांकि यह भी सिर्फ एक अनुमान है. फिलहाल 'Te Lapa' की यह रहस्यमयी बिजली पूरी दुनिया के लिए एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है








