राजेश खन्ना बॉलीवुड के सुपरस्टार, जिन्होंने 70 के दौर में लगातार ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार का दर्जा हासिल किया. काका के नाम से पुकारे जाने वाले राजेश खन्ना की इस दौर में आई आनंद फिल्म का खूब जिक्र हुआ क्योंकि इसमें वह अमिताभ बच्चन के साथ नजर आए. ऋषिकेश मुखर्जी द्वारा निर्देशित फिल्म आनंद के डायलॉग मौत एक पल है बाबूमोशाय, बाबू मोशाल जिंदगी बड़ी होनी चाहिए लंबी नहीं. जब तक जिंदा हूं तक तक मरा नहीं ने फैंस के दिलों में छाप छोड़ी. लेकिन इस मूवी के डायलॉग के अलावा गानों की भी खूब चर्चा हुई, जिसमें से एक गाना वो भी है, जो फिल्म में होना नहीं था. लेकिन राजेश खन्ना की गुजारिश पर डायरेक्टर ने लिया और आइकॉनिक बन गया.
जिंदगी कैसी है पहेली आया था राजेश खन्ना को पसंद
हम बात कर रहे हैं आनंद फिल्म के गाने जिंदगी कैसी है पहेली की, जिसके लिरिक्स योगेश ने लिखे थे, जो कुछ इस प्रकार थे...
जिंदगी कैसी है पहेली, हाय
कभी तो हंसाए, कभी ये रुलाये
जिंदगी कैसी है पहेली, हाय
कभी तो हंसाए, कभी ये रुलाये
IMdb के मुताबिक, 3.30 सेकंड के गाने "जिंदगी कैसी है पहेली" असल में फिल्म के टाइटल के लिए बैकग्राउंड सॉन्ग के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए सोचा गया था. लेकिन राजेश खन्ना ने जब गाना सुना तो उन्हें लगा कि इतने अच्छे गाने को टाइटल के लिए बैकग्राउंड सॉन्ग के तौर पर इस्तेमाल करना बेकार होगा. इसलिए उन्होंने डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी को गाने के लिए कोई सिचुएशन बनाने का सुझाव दिया. उन दिनों टाइटल के लिए बैकग्राउंड में बजने वाले गाने रेडियो पर कम ही बजाए जाते थे. इसलिए राजेश खन्ना ने इसे सीन में अपनी अदायगी से फिल्माया. वहीं मन्ना डे की आवाज को अपनी आवाज बना दिया.
आनंद फिल्म की कहानी
आनंद फिल्म की कहानी आनंद (राजेश खन्ना) की है, जो ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) होता है. इसके चलते वह कुछ महीनों का मेहमान है. लेकिन इसके बावजूद अपनी जिंदगी को बेहद खुशी और पॉजिटिविटी के साथ जीता है. इसके बाद आनंद की मुलाकात डॉक्टर भास्कर (अमिताभ बच्चन) से होती है, जो शुरू में उसकी खुशमिजाजी को नापसंद करता है. लेकिन धीरे-धीरे वह उनकी जिंदगी में शामिल हो जाता है. यह कहानी एक संदेश देती है, जिसे ऋषिकेश मुखर्जी ने अपने डायरेक्शन से कल्ट क्लासिक बना दिया है.
आनंद फिल्म के डायलॉग और गाने हुए क्लासिक
राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन ने पहली बार इस फिल्म में साथ काम किया था. वहीं फिल्म के गाने कहीं दूर जब दिन ढल जाए, मैं तेरे लिए, जिंदगी कैसी है पहेली और ना जिया लगे ना आज भी खूब सुनने को मिलते हैं. जबकि राजेश खन्ना के कल्ट गानों में जिंदगी कैसी है पहेली शामिल है.
इसके अलावा बाबू मुशाय, जिंदगी बड़ी शानदार होती है... जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं." , "मौत तो आनी ही है... लेकिन उससे पहले जिंदगी जी लो." "जिंदगी में एक बार जो अच्छा वक्त आता है, वो बार-बार नहीं आता.", "मैं तो मर भी जाऊंगा तो भी हंसते हुए मरूंगा... क्योंकि मैंने जिंदगी हंसते हुए जिया है.", "क्या फर्क पड़ता है कि मौत कितनी दूर है... फर्क तो इस बात का पड़ता है कि जिंदगी कितनी पास है. यह डायलॉग राजेश खन्ना के फैंस को उनकी याद दिलाते हैं.







