कभी घने जंगलों, पहुंचविहीन रास्तों और नक्सलवाद के काले साए से निकला सुकमा जिले का मिनपा क्षेत्र आज बदलाव की एक नई और गौरवशाली इबारत लिख रहा है। विपरीत हालातों के बीच एक अदनी सी झोपड़ी से शुरू हुआ स्वास्थ्य सेवाओं का सफर आज राष्ट्रीय स्तर पर चमक रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील नेतृत्व और सुदृढ़ प्रशासनिक इच्छाशक्ति के चलते मिनपा के उप स्वास्थ्य केंद्र ने 94.94ः अंकों के साथ “राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक“ NQAS) सर्टिफिकेट हासिल किया है। यह उपलब्धि सिर्फ एक प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि नक्सलवाद के काले साए को पीछे छोड़ते हुए विकास की राह पर बढ़ते बस्तर का एक जीता-जागता प्रतीक है।
क्या है NQAS सर्टिफिकेशन
राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS।) भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित मानकीकृत दिशानिर्देशों का एक समूह है जिसमें स्वास्थ्य केंद्रों में वित्तीय प्रोत्साहन, विश्वास में सुधार, परिचालन दक्षता का आंकलन किया जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से तैयार किए गए इन मानकों का उपयोग अस्पतालों और क्लीनिकों द्वारा देखभाल का मूल्यांकन करने, रोगी संतुष्टि बढ़ाने और आधिकारिक राष्ट्रीय प्रमाणन प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
झोपड़ी से अत्याधुनिक अस्पताल तक का सफर
साल 2024 में प्रशासन की तत्परता से मिनपा की वह पुरानी झोपड़ी एक भव्य, नवीन और अत्याधुनिक उप स्वास्थ्य केंद्र भवन में तब्दील हो गई। आज इस अस्पताल में न केवल आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और उन्नत प्रयोगशाला कक्ष मौजूद हैं, बल्कि एक समर्पित स्टाफ भी चौबीसों घंटे तैनात रहता है। यह केंद्र अब मिनपा सहित दुलेड़, एलमागुंडा, भटपाड़, पोट्टेमडगू, टोंडामरका और गुंडराजपाड़ जैसे धुर नक्सल प्रभावित रहे और दुर्गम गांवों की लगभग 3,593 ग्रामीणों की आबादी के लिए एक “संजीवनी केंद्र“ बनकर उभरा है, जिसने बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को हर गरीब की पहुंच में ला दिया है।
दुर्गम राहें और “नाईट कैंप“ का सेवाभाव
इस प्रशासनिक व्यवस्था की सबसे खूबसूरत और मानवीय झलक तब देखने को मिलती है, जब स्वास्थ्य विभाग के जांबाज कर्मवीर खुद चलकर ग्रामीणों के द्वार तक पहुंचते हैं। पूरी तरह कटे हुए पहुंचविहीन गांवों में जाने के लिए स्टाफ को बेहद कठिन और जोखिम भरे जंगली रास्तों का सामना करना पड़ता है। कई बार जब दिन ढलने पर लौटना मुमकिन नहीं होता, तो ये जांबाज हार मानने के बजाय वहीं जंगलों के बीच रुककर “नाईट कैंप“ लगाते हैं। रात के सन्नाटे में टॉर्च और लालटेन की रोशनी में मरीजों की जांच और उपचार करना इनके सेवाभाव की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि मिनपा उप स्वास्थ्य केंद्र को NQAS सर्टिफिकेट मिलना पूरे सुकमा जिले के लिए एक ऐतिहासिक और अत्यंत गौरवशाली क्षण है। एक समय था जब इस अंदरूनी क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के संवेदनशील नेतृत्व और “नियद नेल्लानार“ (आपका अच्छा गांव) योजना की प्राथमिकताओं के चलते आज हम सुदूर अंचलों की तस्वीर बदलने में कामयाब हो रहे हैं।
ग्रामीणों का बढ़ता भरोसा और जमीनी संघर्ष को सलाम
इसी निस्वार्थ समर्पण का सुखद परिणाम है कि आज इस सुदूर केंद्र में हर दिन 20 से अधिक मरीजों की ओपीडी हो रही है और हर महीने करीब 4 से 5 सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराए जा रहे हैं, जो कभी एक सपना हुआ करता था। प्रशासन और जनता के इस अटूट समन्वय ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो बंदूक की धमक पर विकास की धमक हमेशा भारी पड़ती है।
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