कोलकाता, 08 अप्रैल । पश्चिम बंगाल में आगामी दो चरणों में हाेने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारत निर्वाचन आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इसके अलावा आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
तृणमूल कांग्रेस का चार सदस्यीय एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को नई दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग मुख्यालय पहुंचा और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा के सदस्य डेरेक ओ ब्रायन, सागारिका घाेष, मेनका गुरुस्वामी तथा पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता साकेत गाेखले माैजूद थे। इस दाैरान बैठक में पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)
प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
बैठक के कुछ समय बाद ही निर्वाचन आयोग ने अपने साेशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक बयान जारी किया, जिसका शीर्षक था ‘तृणमूल कांग्रेस से निर्वाचन आयोग की सीधी बात’। जारी बयान में कहा गया कि इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव भयमुक्त, हिंसामुक्त, दबावमुक्त और प्रलोभनमुक्त होंगे तथा बूथ कब्जा और मतदान में बाधा जैसी घटनाओं को भी रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।
निर्वाचन आयोग के इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अपने साेशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जवाबी बयान जारी किया। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि इस बार चुनाव दिल्ली के नियंत्रण, राजनीतिक पक्षपात, चुनिंदा कार्रवाई और दोहरे मानदंडों से मुक्त होने चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस ने एक अन्य बयान में यह सवाल भी उठाया कि क्या किसी संवैधानिक संस्था को इस प्रकार की चुनौतीपूर्ण भाषा का प्रयोग करना चाहिए। पार्टी ने आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर बैठक के दौरान असहयोग का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि बैठक में कोई सार्थक चर्चा नहीं हुई और उनके साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार किया गया।
हालांकि, निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बैठक के दौरान तृणमूल प्रतिनिधियों से कई बार आवाज धीमी रखने और मर्यादित भाषा का प्रयोग करने का अनुरोध किया था।
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बैठक के बाद तृणमूल कांग्रेस और निर्वाचन में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू








