केनेथ शॉक और Neuralink वॉइस इम्प्लांट: ALS मरीज के लिए नई आवाज़ की उम्मीद
एमयोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) से पीड़ित केनेथ शॉक ने जनवरी 2026 में Neuralink का वॉइस इम्प्लांट लगाया, और वे इसके दूसरे प्राप्तकर्ता बने। केनेथ ने एक्स पर साझा किया कि इस तकनीक ने उनकी जिंदगी में किस तरह बदलाव लाया। अब वे जो बोलना चाहते हैं, उसके बारे में सिर्फ सोचते हैं, और Neuralink डिवाइस उनकी अपनी आवाज में वही शब्द बोल देता है। ALS के चलते उनकी बोलने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म हो रही थी, लेकिन अब यह ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस उन्हें फिर से अपनी बात दूसरों तक पहुंचाने का मौका दे रहा है।
कैसे काम करता है Neuralink वॉइस इम्प्लांट?
केनेथ ने इस साल की शुरुआत में N1 इम्प्लांट लगवाया। उन्होंने साझा किए वीडियो में दिखाया कि Neuralink सॉफ्टवेयर दिमाग के सिग्नल से 'फोनीम' (आवाज की सबसे छोटी इकाई) को डिकोड करता है, फिर उन्हें शब्दों में बदलकर मरीज की आवाज में प्रस्तुत करता है।
दिमाग की सोच को देता है आवाज
टेस्ला के CEO एलन मस्क ने भी बताया कि Neuralink का ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस दिमाग की एक्टिविटी को शब्दों में बदल सकता है। इस तकनीक के जरिए जो लोग चोट या बीमारी के कारण बोलने में असमर्थ हैं, वे अब केवल सोचकर अपनी बात दूसरों तक पहुंचा सकते हैं।
डिवाइस रिकॉर्ड करता है न्यूरल एक्टिविटी
Neuralink ने वॉइस क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह तकनीक बोलने में असमर्थ लोगों की बातचीत की क्षमता कैसे वापस ला सकती है। BCI एप्लीकेशंस के हेड निर इवेन चेन के अनुसार, डिवाइस दिमाग के उस हिस्से से न्यूरल एक्टिविटी रिकॉर्ड करता है, जो बोलने की प्रक्रिया में शामिल होता है। ALS धीरे-धीरे केनेथ की बोलने की क्षमता छीन चुका था, लेकिन Neuralink के वॉइस ट्रायल से उनके रोजमर्रा के जीवन में स्वतंत्रता और आवाज लौट रही है।






.jpg)

